लप्रेक : 01

ये राजीव चौक मेट्रो स्टेशन कितना कोम्प्लिकेटेड है।
मुझे लगता है इंसान इससे जयदा कोम्प्लिकेटेड है।
तुम आते ही सुरु होगये। तुम्हे आये हुए ज्यादा टाइम तो नहीं हुआ ना।
नहीं, यहाँ वैसे भी कौन बोर होता है।
तुम काफ़ी बदल गए हो। जीम करना छोड़ दिए क्या?
मैं तुम्हारे बारे में नहीं बोल सकता क्यूंकि मैं तुम्हे कभी जाना नहीं।
तुम अभी तक गुस्सा हो, ये बोल कर वो इधर उधर देखने लगती है।
इतनी भीड़ में इसकदर ख़ामोशी छायेगी सोचा नहीं था।
घर पर सब कैसे है? लास्ट टाइम कब घर गए थे?
सब बढियां है, घर डेढ़ साल पहले, जून २०१३.
क्या कर रहे हो। ये सब करने का क्या फायदा।
अगर फायदे के लिए सब कुछ करता तो काम सा काम ये हाल तो नहीं होता।
अच्छा, ये गुस्सा मेरी वजह से है या पुरानी वाली के वजह से।
फिर ख़ामोशी, और मुस्कराते रहने की कोशीश।
पोएम लिखते हो या छोड़ दिए|

अभी तुरंत एक लाइन आई है, सुनो

एक बार फिर अपना समझ कर देखेंगे।
एक बार फिर चोट खा कर देखेंगे ।

तुम नहीं मानोगे, मैं चलती हूँ, bye.
रुको।

ये सुना चुके हो शायद……….थैंक गॉड, तुमने मेरे हस्बैंड के बारे में नहीं पूछा। जिससे मिलो वो यही पूछता है।
मैं जानबुझकर नहीं पूछा, तुम्हे कहाँ किसीकी फ़िक्र रहती है।
Ok Bye
अरे रुको एक और लाइन्स सुनाता हूँ।

अगर तमन्ना है, तो तम्मना तेरी।
अगर आरजू है, तो आरजू तेरी ।
अगर इश्क है, तो वो मुस्करात तेरी।
अगर वफ़ा है, तो बेवफाई तेरी।

सीसीडी चलो कॉफी पीते है। या कॉफी पीना भी छोड़ दिए।

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